
चंडीगढ़। हरियाणा में धान की कटाई के सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और चालान करने के साथ उनके रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ की जाएगी। निर्धारित पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि की वसूली का भी प्रावधान है। इसके साथ ही जिला और ब्लॉक स्तर पर ‘पराली संरक्षण बल’ गठित कर खेतों की निगरानी बढ़ाने की तैयारी की गई है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने गुरुवार को पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के अनुपालन को लेकर तैयार राज्य कार्य योजना की समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों को जमीनी स्तर पर निगरानी मजबूत करने और पराली जलाने की घटना सामने आने पर निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
जिला और ब्लॉक स्तर पर बनेगा पराली संरक्षण बल
पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर ‘पराली संरक्षण बल’ गठित किए जाएंगे। इन टीमों की जिम्मेदारी खेतों की निगरानी करने, आग लगने की घटनाओं का पता लगाने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की होगी।
देर शाम और रात के समय भी निगरानी बढ़ाने की योजना है। खेतों में आग की घटनाओं पर नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल भी किया जाएगा। इसका उद्देश्य पराली जलाने की घटना की जल्द पहचान कर समय रहते संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देना है।
राज्य सरकार ने जिला प्रशासन, कृषि विभाग और अन्य संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा है। फील्ड स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों को भी जिम्मेदारी दी जाएगी।
तीन स्तर पर होगी कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाने के मामलों में कार्रवाई केवल आर्थिक जुर्माने तक सीमित नहीं रहेगी। उल्लंघन सामने आने पर एफआईआर और चालान की कार्रवाई के साथ संबंधित रिकॉर्ड में रेड एंट्री की जाएगी। पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि भी वसूल की जाएगी।
राज्य के जिलों में प्रशासन ने किसानों को इस कार्रवाई के बारे में जागरूक करना शुरू कर दिया है। हरियाणा सरकार की 24 सितंबर की एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि फसल अवशेष जलाने वाले किसान के रिकॉर्ड में रेड एंट्री होने पर उसे सरकारी खरीद में फसल बेचने से रोकने जैसे परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं।
केंद्र ने हाल में रेड एंट्री से संबंधित नियमों में बदलाव का एक मसौदा भी जारी किया है। इसमें रेड एंट्री की अवधि 15 महीने रखने और दोबारा उल्लंघन या पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि नहीं चुकाने पर इसे आगे बढ़ाने का प्रस्ताव है। यह केंद्रीय प्रस्ताव अभी मसौदा स्तर पर है और इस पर सुझाव मांगे गए हैं।
रात में बढ़ाई जाएगी गश्त
पराली जलाने की कई घटनाएं निगरानी से बचने के लिए देर शाम या रात में किए जाने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने इस अवधि में गश्त बढ़ाने की योजना बनाई है। पराली संरक्षण बल और संबंधित अधिकारी संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखेंगे।
ड्रोन के जरिए खेतों की निगरानी भी इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। इससे बड़े कृषि क्षेत्र पर नजर रखने और आग की घटना का तेजी से पता लगाने में मदद मिल सकती है।
स्थानीय स्तर पर सरपंचों, नंबरदारों और अन्य प्रतिनिधियों का सहयोग लेने के निर्देश भी दिए गए हैं। किसानों तक जागरूकता संदेश पहुंचाने के लिए धार्मिक स्थलों के लाउडस्पीकर और सोशल मीडिया समूहों का इस्तेमाल करने के निर्देश जिलों में दिए जा रहे हैं।
किसानों को जागरूक करने पर भी जोर
सरकार ने दंडात्मक कार्रवाई के साथ किसानों को पराली प्रबंधन के विकल्प उपलब्ध कराने और जागरूक करने पर भी जोर दिया है। कृषि विभाग के अधिकारियों को गांवों में जाकर किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले पर्यावरणीय और कृषि संबंधी नुकसान के बारे में जानकारी देने को कहा गया है।
अधिकारियों के अनुसार, खेतों में फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरा क्षमता प्रभावित हो सकती है और लाभकारी सूक्ष्म जीव भी नष्ट होते हैं। धुएं के कारण वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हरियाणा सरकार की आधिकारिक सूचनाओं में किसानों को सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और बेलर जैसी फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही गई है।
1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन
फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था भी की गई है। सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के बेहतर इस्तेमाल के लिए किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया है।
सरकार का प्रयास है कि किसानों को पराली जलाने के बजाय उसका खेत में या खेत से बाहर उपयोग करने के विकल्प उपलब्ध कराए जाएं। कृषि मशीनरी की उपलब्धता और उसके इस्तेमाल की निगरानी के लिए भी अधिकारियों को व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
पिछले सीजन में सामने आए थे 662 मामले
हरियाणा में पिछले खरीफ सीजन के दौरान पराली जलाने के 662 मामले सामने आए थे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इन मामलों में 231 एफआईआर दर्ज की गई थीं, जबकि 248 किसानों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई थी। जींद जिले में सबसे ज्यादा 176 मामले दर्ज किए गए थे।
इस बार सरकार ने सीजन की शुरुआत से ही निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया है। जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष टीमें बनाने के पीछे उद्देश्य खेतों में आग की घटनाओं की जल्द पहचान और रोकथाम करना है।
CAQM के निर्देशों के अनुपालन पर जोर
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने समीक्षा के दौरान वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा। हरियाणा का बड़ा हिस्सा दिल्ली-एनसीआर के आसपास होने के कारण खरीफ सीजन में पराली जलाने और वायु प्रदूषण का मुद्दा प्रमुखता से सामने आता है।
सरकार अब निगरानी, कार्रवाई और प्रोत्साहन के तीन स्तरों पर काम कर रही है। एक ओर पराली जलाने वालों के खिलाफ एफआईआर, चालान, रेड एंट्री और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति जैसी कार्रवाई होगी, वहीं दूसरी ओर किसानों को मशीनरी और आर्थिक प्रोत्साहन के जरिए फसल अवशेष प्रबंधन के विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।





